रविवार, 3 अक्टूबर 2010

भारत की गरीबी और महंगाई

देश में महंगाई आम जनता के ऊपर इस कदर हैवी है की उनको कई ऐसी चीजों से दूरी बनानी पद रही है, जिसे वे खरीद सकने में अक्षम है। दूसरी ओर महंगाई को लेकर ऊँची कुर्सी में बैठे नेताओं को इसकी कोई चिंता नहीं है। तभी तो महंगाई के नाम पर कृषि मंत्री शरद पवार आये दी ऐसे-ऐसे बयान दे जाते हैं, जिससे देश की आम जनता को आघात लगता है। बावजूद ये नेता जनता की चिंता कम करते हैं। ऐसा नहीं होता तो, वे आये दी महंगाई बढ़ने के लिए बयान नहीं देते। कृषि मंत्री तो जब भी मुंह खोलते हैं, उस दिन उनका बयान आम जनता के लिए शामत बनकर आता है। बीते कुछ सालों से देश जनता महंगाई से ऐसी पीस रही है, लेकिन आम आदमी के साथ हाथ होने का दावा करने वाली पार्टी के नेता केंद्र में सरकार बनते ही इन बातों को भूल गए हैं। इस तरह बेचारी आम जनता जाए तो जाए कहाँ।
अभी हाल ही में कृषि मंत्री शरद पवार ने एक बार फिर जिस तरह से गैर जिम्मेदाराना बयान दिए हैं, उससे तो जनता की कोई अहमियत ही नहीं रह गई है। जिस जनता के पैसे से वह कृषि मंत्री को सभी सुविधाएँ नसीब हो रही हैं, उन्ही के बारे में जब सरकार और उसके मंत्री सोचना बंद कर दे तो भला इसे क्या कहा जा सकता है। महंगाई के कारन लोग जैसे-तैसे अपना जीवन जी रहे हैं, वहीँ इन्हीं जनता के पैसे से ये नेता ऐश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उस जनता की फिक्र करने की जरुरत नहीं है, जिन्होंने इन जैसों को कुर्सी पर बीती है। उसी जनता को किनारा करके कृषि मंत्री शरद पवार जैसे नेता मजे कर रहे हैं। महंगाई को लेकर आम जनता में हाय-तौबा मची है, लेकिन नेता है की बयान देने से बाज नहीं आते। शरद पवार ने अह कहा है की भारत में जितनी महंगाई है, उससे कहीं ज्यादा दुनिया के कई देशों में है। यह बात भी सही है, लेकिन कृषि मंत्री जी जिन देशों में महंगाई भारत से अधिक होने की बात कह रहे हैं, का वहां भारत जैसी गरीबी है ? निश्चित ही ऐसा नहीं है, जी देशों में महंगाई अधिक है, वहां आम लोगों की आय इतनी अधिक है की उन्हें महंगाई का कोई फर्क ही नहीं पड़ता, जबकि भारत में गरीबी इस कदर है की आम जनता की महंगाई के कारन हालत खराब है। रोज जनता महंगाई से पिस रही है। जनता की बेबसी का अंदाजा सुरेश तेंदुलकर की रिपोर्ट से पता चलता है, जिसमें बताया गया है की कैसे भारत की गरीब जनता महज २० रूपये में गुजारा करती है। यहाँ पर हमारा यही काना है की भारत में महंगाई बढती जा रही है और इस देश के नेता अपनी जवावदेही से बचने के लिए अनाप-शनाप बयान दे तो फिर ऐसे नेताओं की मनसिकत को दिवालियापन ही कहा जा सकता है।
महंगाई को लेकर ऐसा पहली बार बयान कृषि मंत्री ने नहीं दिया है, इससे पहले वे कुछ ऐसा कह जाते थे, जिसके बाद महंगाई बढती थी और इसका सीधा लाभ माल दबा कर रखने वालों को मिलता था। अह सिलसिला अब भी जारी है। महंगाई बढ़ रही है और जनता उसके निचे रह कर सब सहन कर रही है। हल्लंकी नेताओं के बयानबाजी को आम जनता समझ रही है, आने वाले दिनों में इस आम आदमी के साथ होने का दवा करने वाली सरकार को जरुर सबक सिख्येगी।

यहाँ दिलचस्प बात यह है की महंगाई पर अन्किश हमारे अर्थशात्री प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी नहीं लगा सके, वे केवल इतना दिलासा जनता को देते आ रहे हैं की जल्दी ही महंगाई से निजात पा ली जायेगे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। आलम यह है की इस महंगाई से केवल व जनता ही पीस रही है, जिनके पैसे से सरकार चल रही है और उसके मंत्री मजे की जिंदगी जी रहे हैं।

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

कामनवेल्थ और कलमाड़ी का बडबोलापन

कामनवेल्थ गेम्स से जैसे विवादों और भ्रस्टाचारका नाता पूरी तरह से जुड़ गया है। आयोजन के कर्ताधर्ता सुरेश कलमाड़ी चौतरफा घिरे है। बावजूद उनके द्वारा जिस तरह के बयान दिए जा रहे है, उसे उनकी गैर जवाबदेही ही करार दी जा सकती है। कामनवेल्थ गेम्स के आयोजन को महज एक दिन ही बचे हैं और खेलगांव में जिस तरह अव्यवस्था की बात सामने आ रही है, वह खिलाडियों के हित में कदापि नहीं है। खेलगांव में साँपों ने भी सिरदर्दी बाधा दी है, क्योंकि ऐसा शायद ही कोई दी गुजर रहा है, जब वहां सांप न निकल रहे हों। सुरेश कलमाड़ी पर अब तक चौतरफा आरोप ला चुके हैं। पूर्व खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर ने जैसा आरोप खेल की व्यवस्थाओं तथा गड़बड़ियों को लेकार गलाया है, उस पर ना तो केंद्र सरकार ने संज्ञान लिया और ना ही दिल्ली की शिला दीक्षित सरकार ने। कुल -मिलकर कलमाड़ी का बल्ले है। देश की कमान संभल रहे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जैसे साफ छवि के व्यक्ति ने भी भ्रस्टाचार की शिकायत के बाद भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया, ऐसे में केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं। देश के खेलमंत्री श्री गिल ने भी चुप्पी साध रखी है। साथ ही कई बड़े नेता भी क्यों इन भ्रस्टाचार के खुलासे के बाद भी मुंह नहीं खोल रहे हैं, इसे समझा जा सकता है।
कामनवेल्थ गेम्स में तमाम भ्रस्टाचार के आरोप के बाद भी कलमाड़ी का यह कहना की खेल के समापन के बाद हालत सुधर जायेंगे और उनके कार्य को समझ लिया जायेगा। भला इतने आरोप और घटिया निर्माण की पोल खुलने के बाद भी आखिर कलमानी ने इतनी आश किसके शाह पर राखी है। जनता के पैसे को इस तरह पानी की तरह बहाया जा रहा है और जनता है की महंगाई के कारन परेशां है। खिलाडियों के विकास के कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन करने की बात सरकार और उसके नुमैन्दे करते आ रहे हैं, ऐसे सवाल यही है की इतने भ्रस्टाचार के बाद भी क्या लगता है की खेलों का विकास होगा और खिलाडियों इस आयोजन से लाभ होगा। हमारा तो मन्ना है की इस आयोजन से केवल सुरेश कलमानी तथा उसके जैसे अजगर का ही पेट भर सकता है। ऐसा नहीं होता तो वे भारत के गौरव के लिए आयोजित किये जा रहे कामनवेल्थ गेम्स जैसे आयोजन में जनता के पैसे का बंदरबाट नहीं होता।
भले ही प्रधानमंत्री चुप हों। लेकिन उसी सरकार के मंत्री और आई सी सी अध्यक्ष शरद पवार ने भी सुरेश कलमानी की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है और भार्स्ताचार पर रिक लगाने की बात कही है। मीडिया में भी रोज कामनवेल्थ गेम्स को लेकार कई रिपोर्ट आ रही है। बावजूद सरकार इन कमियों को दूर करने कोई कदम उठते नहीं दिख रही है। ऐसे में सरकार पर ही ऊँगली ना उठे तो कैसे।
अभी टी ऐसा लगता है, जैसे कामनवेल्थ गेम्स के नाम पर विवादों की यह तो एक शुरुआत भर लगता है, क्योंकि जब खेल ख़त्म हो जायेगा तो एक फिर कामनवेल्थ के नाम पर हुए भ्रस्टाचार का विवाद एक बार फिर गहराने के आसार हैं।

रविवार, 26 सितंबर 2010

सुलगता काश्मीर और सरकार

भारत का स्वर्ग कहा जाने वाला प्रदेश काश्मीर पिछले कुछ माह से सुलग रहा है। काश्मीर में छाई अलगाववादी ताकतों के कारण वहां के बाशिंदों का जीना दूभर हो गया है। ऐसी घिनौनी ताकतों को न कश्मीर की सरकार रोक पा रही है और ना ही केंद्र में बैठी मनमोहन की सरकार। जम्मू काश्मीर के मुख्यमंत्री श्री अब्दुल्ला भी इन अलगाववादियों पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। यह एक अफसोसजनक पहलू है। प्रदेश में युवा मुख्यमंत्री के कुर्सी सँभालने के बाद जम्मू-काश्मीर के लोगों को लगा था क़ि राज्य में अलगाववादियों पर बंदिश लगेगी, लेकिन उनकी सोच पर तब आघात लगी, जब वे अभी प्रदेश में हालात बिगड़ने के बाद एक कमजोर मुख्यमंत्री साबित हुए हैं। प्रदेश में पहले उनके पिता भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं, ऐसे में माना जा रहा था क़ि वे किसी तरह राज्य क़ि स्थिति पर नियंत्रण कर लेंगे। पर ऐसा हुआ नहीं, उलटे जिस तरह से दिनों-दिन काश्मीर में हालात बिगड़ रहें हैं, उससे सरकार क़ि क्षमता पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्र में बैठे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी काश्मीर क़ि स्थिति सुधारने में कामयाब नहीं हो सके हैं। उनहोंने शान्ति बहाली की अपील की हैं, वही एक उपलब्धि नजर आती है। अभी हाल में केंद्र सरकार द्वारा छात्रों क़ि रिहाई का महत्वपूर्ण फैश्ला किया है। जिसका विपक्ष भाजपा ने भी स्वागत किया है। जो भी हो, काश्मीर के हालात में सुधार के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

गुरुवार, 3 सितंबर 2009

मनमोहन की भलमनशाहत और भाजपा

भाजपा में आजकल जो कुछ हो रहा है, इससे देश की सबसे बड़ी दूसरी पार्टी एक बार फिर तितर बितर होती नजर आ रही है। पिछले एक माह में जिन्ना को लेकर पार्टी में कोहराम मचा है। इससे पार्टी पदाधिकारियों के विचार को विखण्डित करके रख दिया है। पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के लिखी किताब, जिसमें भाजपा ने आपत्ति दर्ज की है। भाजपा नेताओं के अलग अलग बयान से भाजपा में बिखराव की स्थिति है।
इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा को नसीहत दे डाली की देश की सबसे दूसरी पार्टी में इस तरह बिखराव देश के घातक है। ऐसे में मजबूत विपक्ष की भूमिका नहीं निभ सकती। इसे मनमोहन की भल मन शाहत ही कहें की उनहोंने मजबूत विपक्ष की चिंता की, लेकिन इसके लिए उन्हें भाजपा की और से खरी खोटी ही सुनने को मिली। भाजपा के प्रवक्ता प्रकास जावडेकर ने दो टूक शब्दों में कहा की मनमोहन जी को भाजपा की चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है, वे देश की चिंता करें। देश में महंगाई, सूखा तथा फ्लू से लोग परेशान व दहशत गर्द हैं। ऐसे में भाजपा में जो कुछ हो रहा है, यह पार्टी का अंदरूनी मामला है, इसमें किसी की हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह निश्चित ही दिल से साफ व्यक्तित्व के धनि है और उनहोंने जो कुछ कहा, उसमें किसी तरह से भाजपा को ताना देने या फिर जले में नमक छिडकने का भावः नहीं था। ऐसे में भाजपा की और से जो बयान आया, इसे किसी भी सूरत में ठीक नहीं कहा जा सकता। इसे तो ऐसा हुआ जैसे आग भुझाने गया व्यक्ति ख़ुद ही जल जाए। दूसरी और कईयों ने तो प्रधानमंत्री के सलाह को पते में हाथ डालने कहने से परहेज नहीं किया।
इसके पहले समाजवादी के महासचिव अमर सिंह ने भी भाजपा में जिन्ना की पुस्तक के कारन आए बिखराव पर चिंता जाहिर की थी। इस पर भाजपा की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। ऐसे में जब मनमोहन जी ने विपक्ष के टूटते तारों को जोड़ने की बात क्या कही, भाजपा में भूचाल आ गया।
वैसे भी जिन्ना का भूत भाजपा का साथ नहीं छोड़ रहा है। एक साल पहले भाजपा के वरिष्ट नेता लालकृष्ण आडवानी जब पाकिस्तान गए थे। इस दौरान वे जिन्ना के मजार में माथा टेकने गए थे। इसके बाद भाजपा में भूचाल मच गया, लेकिन उन पर गाज नहीं गिरी।
अब जब जसवंत सिंह ने अपनी किताब में जिन्ना को हीरो बनाया। तो भाजपा में आग लग गई। स्थिति यह रही की जसवंत सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अभी भी जिन्ना के भूत ने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा है। लिहाजा भाजपा में कलह जरी है और यह कलह थमता नजर नहीं आ रहा है।

शनिवार, 29 अगस्त 2009

कांग्रेस की युवा शक्ति को मिली संजीवनी

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गाँधी के पिछले दिनों हुए छत्तीसगढ़ दौरे कई लिहाज से काफी अहम् रहे। उनके लोकसभा चुनाव के बाद यह छत्तीसगढ़ का पहला दौरा था। इस बार वे किसी प्रचार में नहीं निकले थे, बल्कि प्रदेश के कांग्रेस युवा शक्ति को जोड़ने आए थे। उनके इस दौरे से बजन सी पड़ी कांग्रेस की युवा शक्ति में जान आ गई है। युवा संसद राहुल गाँधी के दौरे से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस युवा शक्ति को जैसी संजीवनी मिल गई है।

राहुल बाबा के दौरे से युवक कांग्रेस व एन एस यु आई के कार्यकर्ताओं में उर्जा का संचार हो गया है। राहुल कार्यक्रम में जिस ढंग से युवाओं में उत्साह देखा गया। इसे कांग्रेश की युवा शक्ति की बढती ताकत ही कही जा सकती है।

विधानसभा चुनाव के पहले राहुल गाँधी का टैलेंट हंट चला था, जिसमें कुछ कर गुजरने वाले कार्यकर्ताओं को चुन्हंकित किया। इस बार के उनके यात्रा में वे युवा शक्ति को जोड़ने का प्रयास किया और उन्होंने इसके लिए यूनिवर्सिटी के कैम्पस को चुना। वे जानते हैं की उनके विचारों को कहाँ से नई उड़ान हासिल हो सकती है। राहुल गाँधी ने अपने दो दिवसीय कार्यक्रम में पूरी तरह युवा शक्ति को जागृत करने वाली बातों को फोकस किए।

इस बार उन्होंने प्रदेश प्रभारी होने के नाते एन एस यु आई में नए व उर्जावान चेहरों को सामने लाने नया प्रयोग शुरू किया है। इस बार चलाये जा रहे उनके सदस्यता अभियान में ऐसे युवाओं को ही सदस्यता दी जा रही है, जो कॉलेज में पढ़ते हैं। कुल-मिलाकर राहुल बाबा की सोच ऐसी युवा शक्ति का निर्माण करने का है, जो देश की खोखली हो राजनीती को अपनी ओजस्वी कार्यों से भर सके। उन्होंने यह बात भी कही है की युवा शक्ति ही देश में नया परिवर्तन ला सकता है।

राहुल गाँधी का छत्तीसगढ़ में बिताये दो दिन कांग्रेस की नींव कही जाने वाली एन एस यूं आई को नए सिरे से जीवित करने में अहम् भूमिका निभाई है। कल तक एक भी इनकी गधिविधि देखने को नहीं मिलती थी। अब ये राहुल बाबा के बातों को समझ गए हैं और लग गए हैं, युवाओं की नै ब्रिगेड बनाने।

भले ही राहुल गांघी का विधानसभा व लोकसभा के चुनाव में जादू न चला हो, लेकिन इस बार के उनकी छत्तीसगढ़ दौरे को कमतर नहीं आँका जा सकता। उन्होंने बातों-बातों में कांग्रेस की गुटबाजी को दोनों चुनाव में हार का कारन बताते हुए वरिष्ट नेताओं को एका करने की सम्झायिस भी दे दिए। प्रेस कांफ्रेंस में भी वे छत्तीसगढ़ में लगातार कांग्रेस की हार का ठीकरा वरिस्ट नेताओं के सर फोड़ा। इस बात को नेताओं ने स्वीकार भी। लेकिन क्या प्रदेश में सांप नेवले की तरह गुटबाजी की दुश्मनी रखने वाले कांग्रेसी, क्या रहू गाँधी की बातों पर सबक ले पाएंगे। यदि ऐसा होता है तो फिर राहुल का जादू ही कहा जा सकता है।

फिलहाल सामने में नगरीय चुनाव है। यहाँ भी कांग्रेस की गुटबाजी हावी रही तो समझ जाईये, इस पार्टी का कोई भला होने वाला नहीं है।

समय रहते कांग्रेसियों को संभलना होगा। नहीं तो जनता सब जानती व समझती है और फिर बाहर का रास्ता दिखा सकती है।

सोमवार, 24 अगस्त 2009

नहीं उतर रहा स्वाईन फ्लू का बुखार

दुनिया में इन दिनों जिस ढंग से लोंगों में स्वाईन फ्लू का बुखार चढा है। इसका प्रभाव भारत में भी देखने को मिल रहा है। देश में स्वाईन फ्लू से लोगों के मरने का आंकडा अब तक ५७ बताया जा रहा है। इस संक्रामक बीमारी को लेकर मीडिया ने जिस ढंग से हाय-तौबा मचाया है, इससे लोग और ज्यादा दहशत में हैं। ऐसा नहीं है की मीडिया की भूमिका लोगों को जागरूक करने में नहीं है, लेकिन स्वाईन फ्लू को लेकर जो बात परोसी जा रही है। इसे किसी भी सूरत में ठीक नहीं कहा जा सकता है।
विश्व स्वास्थय संगठन ने दुनिया के सभी देशों को आगाह किया है। किसी भी बीमारी को लेकर सरकार सतर्क रहनी चाहिए, किंतु ऐसा भी न हो की इसका नकारात्मक असर लोगों में हो। इन दिनों स्वाईन फ्लू को लेकर लोगों में कुछ ऐसी ही स्थिति है। बेवजह लोग डरे सहमें हैं और मुंह को इस ढंग से धक् कर रह रहें की उनके ख़ुद के घर वाले ही उन्हें पहचान नहीं पा रहे हैं।
स्वाईन फ्लू को लेकर यह बात भी विशेषज्ञों स्पष्ट किए हैं हैं की यह संक्रामक बीमारी तापमान कम होने की स्थिति में ज्यादा फैलता है। भारत में वैसे ही तेज तापमान होता है। यहाँ बहुत कम ही स्थान है, जहाँ तापमान कम है। लद्दाख जैसे स्थान में ही तापमान शुन्य से भी कम होता है। देश के अन्य स्थानों में बहुत ही कम देखने को मिलता है। तो ऐसे में गर्म जलवायु होने से देश में इस बीमारी के फैलने की संभावना ही कम नजर आती है। ऐसे में जिस ढंग से स्वाईं फ्लू को लेकर खलभली मची है और समाज का हर वो तबका परेशां है की आखिरकार इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है।
जहाँ देश में स्वाईं फ्लू से लोग अपने को बचने हर वो तरकीब खोज रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग भी हैं, जिनकी मानवता मर गई है और इस संक्रामक बीमारी से निपटने में लोगों का हर सम्भव सहयोग करना चाहिए। इस बीच उन्हें अपनी दुकानदारी की फिक्र है और बीमारी से बचने चेहरे पर लगाने वाला मास्क को भी बाजार में नकली उतर दिए हैं। इस नकली मास्क से वे कमाई करने से नहीं चूक रहे हैं। उन्हें लोगों से कोई हमदर्दी नही हैं, उन्हें तो बस दुकानदारी की चिंता है।
बात यहाँ संक्रामक बीमारी स्वाईं फ्लू की है। देश हर दिन लोग दूसरी अन्य बिमारियों से रोज हजारों की संख्या में मर रहे है। इसकी फिक्र किसी को नही है। लोगों ने जो देखा उससे अमल करना शुरू कर दिया। गौर करने वाली बात है की स्वाईं फ्लू का लक्षण माने जाने वाला निमोनिया से देश में ही हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग मर जाते हैं। इसके आलावा कई संक्रामक बीमारी से लोग असमय ही काल के गाल में समां जाते हैं। दूसरी ओर सड़क दुर्घटना में ही रोज सैकडों लोगों की मौत हो जाती है। यह सब होता है, लोगों के यातायात नियमों से अनजान होने से। ऐसे में लोगों को यातायात संबधी जागरूकता लाकर इन दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। ठीक इसी प्रकार स्वाईं फ्लू बीमारी से लोगों में जागरूकता लाकर इससे बचा जा सकता है।
स्वाईं फ्लू से पुणे व मुंबई को ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है और वहां से आने वाले लोग पहले अस्पताल चेक एप के लिए पहुँच रहे हैं। यह भी देखने में आ रहा है की जो लोग पुणे व मुंबई क्षेत्र से आ रहे हैं, उनसे लोग दूर भाग रहे हैं। बीमारी से सुरक्षा जरुरी है, लेकिन किसी को स्वाईं फ्लू होने की पुस्ती नहीं हुई है तो लोगों का यह रवैया समझ से परे है।
देश भर में एक माह से स्वाईं फ्लू का बुखार चढा है। यह उतरने का नाम नहीं ले रहा है। आख़िर इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। लोगों में ऐसी परिस्थिति से लड़ने सरकार को प्रोत्साहित करना चाहिए।
भगवान् से हमारी कामना है की यह बीमारी को देश ही नहीं वरन दुनिया से खत्म कर दे और लोगों में इसकी व्याप्त दहशत खत्म हो।

गुरुवार, 6 अगस्त 2009

नक्सली बंद करे कायराना हरकत

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने जिस ढंग से तांडव मचा रखा है। इससे सरकार भी बेबस नजर आ रही है। नक्सली बार-बार निर्दोष का खून बहाने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिस ढंग से वे लगातार कायराना हरका कर रहे हैं। इसे मानवता की दृष्टी से कदापि ठीक नहीं कहा जा सकता। जून में नक्सलियों ने करतूत किया, वह मानवता को शर्मशार करने वाला रहा। प्रदेश के अब तक इतिहास में पहली बार नक्सलियों इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया, जिसमें पुलिस कप्तान भी शहीद हो गए। इस दौरान तीन दर्जन पुलिसकर्मियों ने अपनी प्राण की आहुति दे दी। इस घटना के बाद नक्सलियों का हौसला इतना बढ़ गया की वे बीते एक सप्ताह को शहीद सप्ताह घोषित कर दिए और शुरू कर दिए खून से होली खेलना। चार दिन पहले ही कई पुलिस कर्मियों को नक्सलियों ने मार दिया। बावजूद सरकार का रूख अब तक समझ नहीं आ सकी है। अभी मंत्री, नेता कुछ फिन जैसे विधानसभा सत्र में व्यस्त थे। इसके बाद वे माउन्ट आबू के भ्रमण में है। प्रदेश में नक्सली समस्या आग की तरह सुलग रही है और निर्दोष लोंगों की जान जा रही है। सरकार नक्सली समस्या को मिटाने के बजाय फोर्स की कमी बताकर अपनी ख़ुद की कमियों को उजागर कर रहे हैं। नक्सली समस्या से वह क्षेत्र और ज्यादा प्रभावित है, जहाँ विकास की किरने नहीं पहुँच सकी है। नक्सली समस्या आज प्रदेश की एक बड़ी समस्या है। जब कहीं हमला होता है, तो उस आग में पूरा प्रदेश दहलता है। नक्सली आख़िर कायराना हरकत कर जाताना क्या चाहते हैं, यह समझ से परे है। वे केवल आंतंक फैला कर लोंगों को भयभीत करना चाहते हैं। हालाँकि उन नक्सलियों को पता नहीं हैं की ऐसे जवानों के कंधे पर सुरक्षा का भर है, जो अपनी की बाजी लगा देते हैं और लोंगों की जान सुरक्षित रहती है। आख़िर नक्सलियों का यह आंतंक कब तक चलता रहेगा और बीहडों में रहने वाले लोंगों का क्या होगा। उनका विकास कैसे हिगा, यह सोचने वाला कोई नहीं है। इस बारे में चिंतन की जरुरत है।